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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 64 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 7

10.64.7

Mantra ID: 10.64.7

प्र वो॑ वा॒युं र॑थ॒युजं॒ पुरं॑धिं॒ स्तोमैः॑ कृणुध्वं स॒ख्याय॑ पू॒षण॑म् । ते हि दे॒वस्य॑ सवि॒तुः सवी॑मनि॒ क्रतुं॒ सच॑न्ते स॒चितः॒ सचे॑तसः ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.64.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तोताओ! रथ में घोड़े जोड़ने वाले वायु, अनेक कर्म करने वाले इंद्र एवं पूषा की स्तुति करके उनसे अपनी मित्रता स्वीकार कराओ. वे समान बुद्धि वाले एवं ज्ञानयुक्त होकर प्रातःकाल में सविता देव का यज्ञ करते हैं. (७)

EN English Translation

This stotao! Praise the wind who add horses to the chariot, Indra and Pusha who do many deeds and make them accept your friendship. They perform the yajna of Savita Dev in the morning with equal intellect and knowledge. (7)

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