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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 64 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 9

10.64.9

Mantra ID: 10.64.9

सर॑स्वती स॒रयुः॒ सिन्धु॑रू॒र्मिभि॑र्म॒हो म॒हीरव॒सा य॑न्तु॒ वक्ष॑णीः । दे॒वीरापो॑ मा॒तरः॑ सूदयि॒त्न्वो॑ घृ॒तव॒त्पयो॒ मधु॑मन्नो अर्चत ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.64.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

परम महान्‌ एवं तरंगों वाली सरस्वती, सरयू, सिंधु आदि इक्कीस नदियां रक्षा के लिए हमारे यज्ञ में आवें. जल बहाने वाली एवं माता के समान ये दिव्य नदियां हमें घी और मधु के समान जल प्रदान करें. (९)

EN English Translation

The twenty-one rivers like Saraswati, Saryu, Indus, etc., with the ultimate great and waves, should come to our yagna for protection. May these divine rivers, which shed water and like mothers, provide us with water like ghee and honey. (9)

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