Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 67 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 67 • ऋचा / मन्त्र 3

10.67.3

Mantra ID: 10.67.3

हं॒सैरि॑व॒ सखि॑भि॒र्वाव॑दद्भिरश्म॒न्मया॑नि॒ नह॑ना॒ व्यस्य॑न् । बृह॒स्पति॑रभि॒कनि॑क्रद॒द्गा उ॒त प्रास्तौ॒दुच्च॑ वि॒द्वाँ अ॑गायत् ॥ (३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.67.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति ने हंसों के समान शब्द करने वाले अपने मित्रों की सहायता से पणियों द्वारा चुराई गई गायों का पाषाणमय द्वार खोला तथा रंभाती हुई गायों के बंधन ढीले किए. बृहस्पति ने उच्च स्वर से स्तुति की तथा सब जानते हुए गान किया. (३)

EN English Translation

Jupiter, with the help of his friends who spoke similar words to the swans, opened the stone-like door of the cows stolen by the hawks and loosened the bonds of the ramming cows. Jupiter praised with a loud voice and sang knowing all. (3)

卐 HinduText AI