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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 69 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 69 • ऋचा / मन्त्र 10

10.69.10

Mantra ID: 10.69.10

पि॒तेव॑ पु॒त्रम॑बिभरु॒पस्थे॒ त्वाम॑ग्ने वध्र्य॒श्वः स॑प॒र्यन् । जु॒षा॒णो अ॑स्य स॒मिधं॑ यविष्ठो॒त पूर्वा॑ँ अवनो॒र्व्राध॑तश्चित् ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.69.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! मेरे पिता वध्यश्च ने इस प्रकार तुम्हारी सेवा की, जिस प्रकार पिता गोद में बैठाकर पुत्र का पालन करता है. हे अतिशय युवा अग्नि! तुमने मेरे पिता की समिधाएं प्राप्त करके विशेष बाधक शत्रुओं का भी वध किया. (१०)

EN English Translation

O agni! My father Vadhyascha served you in this way, just as the father sits on his lap and obeys the son. O very young agni! You also killed special enemies by getting my father's samidhas. (10)

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