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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 69 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 69 • ऋचा / मन्त्र 8

10.69.8

Mantra ID: 10.69.8

त्वे धे॒नुः सु॒दुघा॑ जातवेदोऽस॒श्चते॑व सम॒ना स॑ब॒र्धुक् । त्वं नृभि॒र्दक्षि॑णावद्भिरग्ने सुमि॒त्रेभि॑रिध्यसे देव॒यद्भिः॑ ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.69.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम्हारे पास सरलता से दुही जाने वाली, एकमात्र सूर्य से संगत व अमृत देने वाली गाय है. तुम देवों की कामना करने वाले, दक्षिणायुक्त एवं प्रधान यज्ञकर्ता सुमित्रवंशियों द्वारा प्रज्वलित किए जाते हो. (८)

EN English Translation

O agni! You have a simple, only cow compatible with the sun and giving nectar. You are ignited by the Sumitravanshis, who wish for the gods, the South-yukta and the chief yajnakar. (8)

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