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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 79 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 79 • ऋचा / मन्त्र 1

10.79.1

Mantra ID: 10.79.1

अप॑श्यमस्य मह॒तो म॑हि॒त्वमम॑र्त्यस्य॒ मर्त्या॑सु वि॒क्षु । नाना॒ हनू॒ विभृ॑ते॒ सं भ॑रेते॒ असि॑न्वती॒ बप्स॑ती॒ भूर्य॑त्तः ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.79.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं मरने वाली प्रजाओं में मरणरहित अग्नि का महान्‌ महत्त्व देखता हूं. इनके दोनों जबड़े अलग-अलग एवं दांतों से भरे हुए हैं. ये जबड़े स्तोता को न चबाकर लकड़ियों का भक्षण करते हैं. (१)

EN English Translation

I see the great importance of deathless agni in the dying people. Both of their jaws are separate and full of teeth. These jaws feed on the wood without chewing the stotha. (1)

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