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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 80 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 80 • ऋचा / मन्त्र 7

10.80.7

Mantra ID: 10.80.7

अ॒ग्नये॒ ब्रह्म॑ ऋ॒भव॑स्ततक्षुर॒ग्निं म॒हाम॑वोचामा सुवृ॒क्तिम् । अग्ने॒ प्राव॑ जरि॒तारं॑ यवि॒ष्ठाग्ने॒ महि॒ द्रवि॑ण॒मा य॑जस्व ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.80.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बुद्धिमान्‌ ऋभुओं ने अग्नि के लिए स्तुतियां बनाई हैं. हमने भी महान्‌ अग्नि की स्तुति की है. अतिशय युवा अग्नि! स्तोता की रक्षा करो एवं हमें विशाल धन दो. (७)

EN English Translation

Wise sages have made praises for agni. We have also praised the great agni. A very young agni! Protect The Stota and give us huge wealth. (7)

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