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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 85 • Mantra / Rik 22

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 22

10.85.22

Mantra ID: 10.85.22

उदी॒र्ष्वातो॑ विश्वावसो॒ नम॑सेळा महे त्वा । अ॒न्यामि॑च्छ प्रफ॒र्व्यं१॒॑ सं जा॒यां पत्या॑ सृज ॥ (२२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.85.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे विश्वावसु! यहां से उठो. मैं नमस्कारपूर्वक तुम्हारी पूजा करता हूं. विशाल नितंबों वाली अन्य कन्या को चाहो एवं उसे पत्नी बनाकर स्वयं से मिलाओ. (२२)

EN English Translation

O Vishwavasu! Get up from here. I salute you. Want another girl with huge buttocks and make her a wife and meet yourself. (22)

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