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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 86 • Mantra / Rik 19

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 19

10.86.19

Mantra ID: 10.86.19

अ॒यमे॑मि वि॒चाक॑शद्विचि॒न्वन्दास॒मार्य॑म् । पिबा॑मि पाक॒सुत्व॑नो॒ऽभि धीर॑मचाकशं॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (१९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.86.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं यजमानों को देखता हुआ एवं दासों तथा आर्यों को अलग-अलग करता हुआ यज्ञ की ओर जाता हूं. मैं हवि पकाने वाले एवं सोमरस निचोड़ने वाले का सोमरस पीता हूं तथा बुद्धिशाली यजमान को देखता हूं. इंद्र सबसे श्रेष्ठ हैं. (१९)

EN English Translation

I go to the yagna, looking at the hosts and separating the dasas and the Aryans. I drink the somas of the cook and the somras squeezer and see the wise host. Indra is the best. (19)

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