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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 86 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 2

10.86.2

Mantra ID: 10.86.2

परा॒ ही॑न्द्र॒ धाव॑सि वृ॒षाक॑पे॒रति॒ व्यथिः॑ । नो अह॒ प्र वि॑न्दस्य॒न्यत्र॒ सोम॑पीतये॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.86.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम स्वयं चलकर वृषाकपि के समीप जाते हो. तुम सोमरस के लिए दूसरी जगह नहीं जाते हो. इंद्र सबसे श्रेष्ठ हैं. (२)

EN English Translation

O Indra! You yourself walk near Taurus. You don't go to another place for Somers. Indra is the best. (2)

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