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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 87 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 87 • ऋचा / मन्त्र 8

10.87.8

Mantra ID: 10.87.8

इ॒ह प्र ब्रू॑हि यत॒मः सो अ॑ग्ने॒ यो या॑तु॒धानो॒ य इ॒दं कृ॒णोति॑ । तमा र॑भस्व स॒मिधा॑ यविष्ठ नृ॒चक्ष॑स॒श्चक्षु॑षे रन्धयैनम् ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.87.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! उस राक्षस को भगाओ जो यज्ञ में विघ्न डालता है. हे अतिशय युवा अग्नि! तुम समिधाओं द्वारा प्रज्वलित होकर राक्षस को मारो. हे मानवों को देखने वाले अग्नि! तुम राक्षस को अपने तेज के वश में करो. (८)

EN English Translation

O agni! Drive away the demon who disrupts the yagna. O very young agni! You are ignited by the samididhas and kill the monster. O agni that sees humans! You subdue the monster of your swiftness. (8)

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