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10.94.8
ते अद्र॑यो॒ दश॑यन्त्रास आ॒शव॒स्तेषा॑मा॒धानं॒ पर्ये॑ति हर्य॒तम् । त ऊ॑ सु॒तस्य॑ सो॒म्यस्यान्ध॑सों॒ऽशोः पी॒यूषं॑ प्रथ॒मस्य॑ भेजिरे ॥ (८)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.94.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
ये पत्थर दस उंगलियों रूपी रस्सियों का बंधन पाकर जल्दी-जल्दी काम करते हैं. इनके द्वारा निर्मित सोमरस हरे रंग का होकर निकलता है. ये पत्थर ही निचोड़े गए सोम के रसमय अंश को अमृत अन्न के समान पहले ग्रहण करते हैं. (८)
EN English Translation
These stones work quickly with a ten-fingered rope. The somras produced by them turn out to be green in colour. These stones take the juicey part of the squeezed mon first like the nectar grain. (8)