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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 95 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 95 • ऋचा / मन्त्र 15

10.95.15

Mantra ID: 10.95.15

पुरू॑रवो॒ मा मृ॑था॒ मा प्र प॑प्तो॒ मा त्वा॒ वृका॑सो॒ अशि॑वास उ क्षन् । न वै स्त्रैणा॑नि स॒ख्यानि॑ सन्ति सालावृ॒काणां॒ हृद॑यान्ये॒ता ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.95.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

उर्वशी ने कहा-“हे पुरूरवा! तुम मत मरो. तुम धरती पर मत गिरो. अशुभ भेड़िए तुम्हें न खाएं. स्त्रियों की मैत्री वास्तविक नहीं होती. स्त्रियों का हृदय भेड़ियों के हृदय के समान होता है.” (१५)

EN English Translation

Urvashi said, "O puruva! You don't die. Don't fall to the earth. Don't eat you ominous wolves. Women's friendships are not real. The heart of women is like the heart of wolves." (15)

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