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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 10 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 10 • ऋचा / मन्त्र 9

3.10.9

Mantra ID: 3.10.9

तं त्वा॒ विप्रा॑ विप॒न्यवो॑ जागृ॒वांसः॒ समि॑न्धते । ह॒व्य॒वाह॒मम॑र्त्यं सहो॒वृध॑म् ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.10.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! मेधावी जागरूक एवं प्रबुद्ध स्तोता हव्य वहन करने वाले, मंथनरूप, बल द्वारा उत्पन्न एवं मरणरहित तुमको भली प्रकार प्रज्वलित करते हैं. (९)

EN English Translation

O agni! Meritorious aware and enlightened hymns ignite you well, those who carry the voice, churning, born by force and without death. (9)

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