Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
3.20.5
द॒धि॒क्राम॒ग्निमु॒षसं॑ च दे॒वीं बृह॒स्पतिं॑ सवि॒तारं॑ च दे॒वम् । अ॒श्विना॑ मि॒त्रावरु॑णा॒ भगं॑ च॒ वसू॑न्रु॒द्राँ आ॑दि॒त्याँ इ॒ह हु॑वे ॥ (५)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 3.20.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
मैं दधिक्रा, अग्नि, उषादेवी, बृहस्पति, सविता देव, अश्विनीकुमार, मित्र, वरुण, भग, वसुओं, रुद्रों एवं आदित्यों को इस यज्ञ में बुलाता हूं. (५)
EN English Translation
I invite Dadhikra, Agni, Ushadevi, Jupiter, Savita Dev, Ashwinikumar, Mitra, Varuna, Bhaga, Vasuon, Rudras and Adityas to this yagna. (5)