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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 26 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 26 • ऋचा / मन्त्र 4

3.26.4

Mantra ID: 3.26.4

प्र य॑न्तु॒ वाजा॒स्तवि॑षीभिर॒ग्नयः॑ शु॒भे सम्मि॑श्लाः॒ पृष॑तीरयुक्षत । बृ॒ह॒दुक्षो॑ म॒रुतो॑ वि॒श्ववे॑दसः॒ प्र वे॑पयन्ति॒ पर्व॑ता॒ँ अदा॑भ्याः ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.26.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वेग गाली अग्नियां जल की ओर जावें. बलशाली मरुतों के साथ जल में मिलकर बूंदों को . सब कुछ जानने वाले एवं अपराजेय मरुद्गण अधिक जल से भरे हुए तथा पर्वताकार मेघों को कंपित करते हैं. (४)

EN English Translation

Velocity abuses go towards the agnis water. The drops together in the water with the mighty maruts . The deserts that know everything and are unbeatable, fill with more water and vibrate mountainous clouds. (4)

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