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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 30 • Mantra / Rik 16

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 16

3.30.16

Mantra ID: 3.30.16

सं घोषः॑ श‍ृण्वेऽव॒मैर॒मित्रै॑र्ज॒ही न्ये॑ष्व॒शनिं॒ तपि॑ष्ठाम् । वृ॒श्चेम॒धस्ता॒द्वि रु॑जा॒ सह॑स्व ज॒हि रक्षो॑ मघवन्र॒न्धय॑स्व ॥ (१६)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.30.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हम समीपवर्ती शत्रुओं का भयंकर शब्द सुन रहे हैं. तुम अपने संतापकारी वज्र का इन पर प्रयोग करके इन्हें मारो, इन शत्रुओं को जड़ से समाप्त करो, इन्हें विशेष रूप से बाधा पहुंचाओ तथा पराजित करी. हे इंद्र! पहले राक्षसों को मारो. इसके बाद इस यज्ञ को पूरा करो. (१६)

EN English Translation

O Indra! We are hearing the terrible words of the nearby enemies. You use your annoying thunderbolt on them to kill them, root out these enemies, hinder them specifically and defeat them. O Indra! Kill the monsters first. After this, complete this yajna. (16)

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