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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 41 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 41 • ऋचा / मन्त्र 5

3.41.5

Mantra ID: 3.41.5

म॒तयः॑ सोम॒पामु॒रुं रि॒हन्ति॒ शव॑स॒स्पति॑म् । इन्द्रं॑ व॒त्सं न मा॒तरः॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.41.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे महान्‌, सोमपानकर्ता एवं शक्ति के स्वामी इंद्र! जिस प्रकार गाएं बछड़ों को चाटती हैं, उसी प्रकार हमारी स्तुतियां तुम्हें चाटती हैं. (५)

EN English Translation

O great, the sompaaner and lord of power Indra! Just as cows lick calves, so our praises lick you. (5)

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