Popular:
ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 42 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 42 • ऋचा / मन्त्र 2

3.42.2

Mantra ID: 3.42.2

तमि॑न्द्र॒ मद॒मा ग॑हि बर्हिः॒ष्ठां ग्राव॑भिः सु॒तम् । कु॒विन्न्व॑स्य तृ॒प्णवः॑ ॥ (२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 3.42.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! पत्थरों द्वारा निचोड़े गए एवं कुशों पर रखे हुए सोम के समीप आओ व इसको पीकर तृप्त होओ. (२)

EN English Translation

O Indra! Come near the mon, squeezed by stones and placed on the cushions, and drink it and be satisfied. (2)

卐 HinduText AI