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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 51 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 51 • ऋचा / मन्त्र 9

3.51.9

Mantra ID: 3.51.9

अ॒प्तूर्ये॑ मरुत आ॒पिरे॒षोऽम॑न्द॒न्निन्द्र॒मनु॒ दाति॑वाराः । तेभिः॑ सा॒कं पि॑बतु वृत्रखा॒दः सु॒तं सोमं॑ दा॒शुषः॒ स्वे स॒धस्थे॑ ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.51.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मरुतो! जलवर्षण की प्रेरणा के कारण इंद्र तुम्हारे मित्र हैं. मरुतों ने इंद्र को प्रसन्न किया था. वृत्रहंता इंद्र उनके साथ यजमान के अपने घर में निचोड़े गए सोम को पिएं. (९)

EN English Translation

O Maruto! Indra is your friend because of the inspiration of water showering. The Maruts had pleased Indra. Vrithrahanta Indra drink the soma squeezed with them in his house of hosts. (9)

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