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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 52 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 52 • ऋचा / मन्त्र 4

3.52.4

Mantra ID: 3.52.4

पु॒रो॒ळाशं॑ सनश्रुत प्रातःसा॒वे जु॑षस्व नः । इन्द्र॒ क्रतु॒र्हि ते॑ बृ॒हन् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.52.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पुराण होने के नाते प्रसिद्ध इंद्र! इस प्रातःकालीन यज्ञ में हमारे पुरोडाश का भक्षण करो. इससे तुम्हारा कर्म महान्‌ होगा. (४)

EN English Translation

O Purana being the famous Indra! Eat our purodas in this morning yajna. This will make your work great. (4)

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