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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 54 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 54 • ऋचा / मन्त्र 5

3.54.5

Mantra ID: 3.54.5

को अ॒द्धा वे॑द॒ क इ॒ह प्र वो॑चद्दे॒वाँ अच्छा॑ प॒थ्या॒३॒॑ का समे॑ति । ददृ॑श्र एषामव॒मा सदां॑सि॒ परे॑षु॒ या गुह्ये॑षु व्र॒तेषु॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.54.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

उस सत्य बात को कौन जानता है? उसे कौन करता है? देवों के सामने कौन सा मार्ग भली-भांति जाता है? स्वर्ग में स्थित देवस्थानों से नीचे जो स्थान दिखाई देते हैं एवं जो उत्तम तथा कष्टसाध्य व्रतों द्वारा प्राप्त होते हैं, उन स्थानों को कौन सा मार्ग जाता है? (५)

EN English Translation

Who knows that truth? Who does it? Which path goes well before the gods? What path goes to the places that are seen below the places of the gods in heaven and which are attained by the best and painful fasts? (5)

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