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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 59 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 59 • ऋचा / मन्त्र 6

3.59.6

Mantra ID: 3.59.6

मि॒त्रस्य॑ चर्षणी॒धृतोऽवो॑ दे॒वस्य॑ सान॒सि । द्यु॒म्नं चि॒त्रश्र॑वस्तमम् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.59.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वर्षा द्वारा मनुष्यों का पालन करने वाले मित्र का अन्न सबके द्वारा भोगयोग्य एवं उनका धन अतिशय कीर्तियुक्त है. (६)

EN English Translation

The food of a friend who follows human beings by the rain is enjoyable by all and their wealth is very rich. (6)

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