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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 61 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 3

3.61.3

Mantra ID: 3.61.3

उषः॑ प्रती॒ची भुव॑नानि॒ विश्वो॒र्ध्वा ति॑ष्ठस्य॒मृत॑स्य के॒तुः । स॒मा॒नमर्थं॑ चरणी॒यमा॑ना च॒क्रमि॑व नव्य॒स्या व॑वृत्स्व ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.61.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे समस्त प्राणियों के सामने आनेवाली एवं मरणरहित सूर्य का ज्ञान कराने वाली उषा! तुम आकाश में ऊंची ठहरती हो. हे अति नवीन उषा! एक ही मार्ग में चलने की इच्छुक तुम बार-बार उसी मार्ग में इस तरह चलो जैसे आकाश में सूर्य का पहिया एक ही मार्ग पर चलता है. (३)

EN English Translation

O Usha, who has come before all beings and gives knowledge of the dying sun! You stay high in the sky. Oh, very new Usha! Wishing to walk in the same path, you walk in the same path again and again as if the wheel of the sun in the sky walks on the same path. (3)

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