Mandal 5 • Sukta 84
Rigveda (ऋग्वेद)
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Mandal 5 • Sukta 84
बळि॒त्था पर्व॑तानां खि॒द्रं बि॑भर्षि पृथिवि । प्र या भूमिं॑ प्रवत्वति म॒ह्ना जि॒नोषि॑ महिनि ॥ (१)
हि हिन्दी अनुवाद
हे महती एवं शक्तिशालिनी पृथ्वी! तुम सभी प्राणियों को प्रसन्न करती हो एवं धारण करती हो. (१)
EN English Translation
O earth of greatness and power! You please and hold all beings. (1)
स्तोमा॑सस्त्वा विचारिणि॒ प्रति॑ ष्टोभन्त्य॒क्तुभिः॑ । प्र या वाजं॒ न हेष॑न्तं पे॒रुमस्य॑स्यर्जुनि ॥ (२)
हि हिन्दी अनुवाद
हे विचरण करने वाली पृथ्वी! स्तोता गतिशील स्तोत्रों से तुम्हारी प्रशंसा करते हैं. हे श्वेतरंग वाली! तुम घोड़े के समान गरजने वाले बादल को दूर फेंकती हो. (२)
EN English Translation
O wandering earth! The Psalms praise you with the dynamic hymns. Oh white- colored! You throw away a cloud that thunders like a horse. (2)
दृ॒ळ्हा चि॒द्या वन॒स्पती॑न्क्ष्म॒या दर्ध॒र्ष्योज॑सा । यत्ते॑ अ॒भ्रस्य॑ वि॒द्युतो॑ दि॒वो वर्ष॑न्ति वृ॒ष्टयः॑ ॥ (३)
हि हिन्दी अनुवाद
हे पृथ्वी! तुम्हारे बादल जब चमकते हुए जल बरसाते हैं, तब तुम अपनी शक्ति द्वारा वनस्पतियों को धारण करती हो. (३)
EN English Translation
O earth! When your clouds rain shining water, you hold the vegetation by your power. (3)