Mandal 7 • Sukta 89
Rigveda (ऋग्वेद)
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Mandal 7 • Sukta 89
मो षु व॑रुण मृ॒न्मयं॑ गृ॒हं रा॑जन्न॒हं ग॑मम् । मृ॒ळा सु॑क्षत्र मृ॒ळय॑ ॥ (१)
हि हिन्दी अनुवाद
हे स्वामी वरुण! मैं तुम्हारे द्वारा दिया हुआ मिट्टी का घर प्राप्त न करूं, हे शोभनधन वाले वरुण! मुझे सुखी बनाओ एवं मुझ पर दया करो. (१)
EN English Translation
O Swami Varun! I will not get the house of clay you have given me, O Varuna of Shobhandhan! Make me happy and have mercy on me. (1)
यदेमि॑ प्रस्फु॒रन्नि॑व॒ दृति॒र्न ध्मा॒तो अ॑द्रिवः । मृ॒ळा सु॑क्षत्र मृ॒ळय॑ ॥ (२)
हि हिन्दी अनुवाद
हे आयुधों वाले वरुण! तुम्हारे द्वारा बंधा हुआ मैं ठंड से कांपता हुआ एवं वायुप्रेरित बादल के समान आता हूं. हे शोभनधन वाले वरुण! मुझे सुखी बनाओ एवं मुझ पर दया करो. (२)
EN English Translation
O Varun with arms! Bound by you, I come like a cloud shivering from the cold and air-induced. O Varun with obhavana! Make me happy and have mercy on me. (2)
क्रत्वः॑ समह दी॒नता॑ प्रती॒पं ज॑गमा शुचे । मृ॒ळा सु॑क्षत्र मृ॒ळय॑ ॥ (३)
हि हिन्दी अनुवाद
हे धनस्वामी एवं निर्मल वरुण! मैं असमर्थता के कारण कर्त्तव्य कर्मो का विरोधी बना हूं. हे शोभनधन वाले वरुण! मुझे सुखी बनाओ एवं मुझ पर दया करो. (३)
EN English Translation
O Dhanaswami and Nirmal Varuna! I have become an opponent of duty because of my inability. O Varun with obhavana! Make me happy and have mercy on me. (3)
अ॒पां मध्ये॑ तस्थि॒वांसं॒ तृष्णा॑विदज्जरि॒तार॑म् । मृ॒ळा सु॑क्षत्र मृ॒ळय॑ ॥ (४)
हि हिन्दी अनुवाद
हे शोभनधन वाले वरुण! सागर में रहकर भी प्यासे मुझ स्तोता को सुखी बनाओ एवं मुझ पर दया करो. (४)
EN English Translation
O Varun with obhavana! Even while living in the sea, make my thirsty sonta happy and have mercy on me. (4)
यत्किं चे॒दं व॑रुण॒ दैव्ये॒ जने॑ऽभिद्रो॒हं म॑नु॒ष्या॒३॒॑श्चरा॑मसि । अचि॑त्ती॒ यत्तव॒ धर्मा॑ युयोपि॒म मा न॒स्तस्मा॒देन॑सो देव रीरिषः ॥ (५)
हि हिन्दी अनुवाद
हे वरुण! हम मनुष्य देवों के प्रति जो द्रोह करते हैं अथवा अज्ञानता के कारण तुम्हारे जिस यज्ञकर्म को भूल जाते हैं, उन पापों के कारण हमें मत मारना. (५)
EN English Translation
Hey Varun! Do not kill us because of the sins of those who do evil to the gods or the sacrifices that we humans forget because of ignorance. (5)