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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 102 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 102 • ऋचा / मन्त्र 1

9.102.1

Mantra ID: 9.102.1

क्रा॒णा शिशु॑र्म॒हीनां॑ हि॒न्वन्नृ॒तस्य॒ दीधि॑तिम् । विश्वा॒ परि॑ प्रि॒या भु॑व॒दध॑ द्वि॒ता ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.102.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यज्ञ करते हुए एवं महान्‌ जलों के पुत्र सोम यज्ञ के प्रकाशक रस को बहाते हुए सभी प्रिय हव्यों को व्याप्त करते हैं तथा द्यावा-पृथिवी में वर्तमान हैं. (१)

EN English Translation

While performing yajna and shedding rasa, the publisher of the Som Yajna, the son of the great waters, pervades all the beloved human beings and is present in Dyava-Prithvivi. (1)

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