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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 104 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 104 • ऋचा / मन्त्र 4

9.104.4

Mantra ID: 9.104.4

अ॒स्मभ्यं॑ त्वा वसु॒विद॑म॒भि वाणी॑रनूषत । गोभि॑ष्टे॒ वर्ण॑म॒भि वा॑सयामसि ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.104.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे धनदाता सोम! हमारी वाणी इसलिए तुम्हारी स्तुति करती है कि तुम हमें धन दो. हम तुम्हारे फेलने वाले रस को गाय के दूध के साथ मिलाते हैं. (४)

EN English Translation

O rich man Mon! Our voice praises you so that you give us money. We mix your fading juice with cow's milk. (4)

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