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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 106 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 106 • ऋचा / मन्त्र 11

9.106.11

Mantra ID: 9.106.11

धी॒भिर्हि॑न्वन्ति वा॒जिनं॒ वने॒ क्रीळ॑न्त॒मत्य॑विम् । अ॒भि त्रि॑पृ॒ष्ठं म॒तयः॒ सम॑स्वरन् ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.106.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्तोतागण शक्तिशाली, जल में क्रीड़ा करने वाले एवं भेड़ के बालों से बने दशापवित्र को पार करने वाले सोम को स्तुतियों द्वारा बढ़ाते हैं. स्तुतियां सवनों वाले सोम की प्रशंसा करती हैं. (११)

EN English Translation

The Psalms raise the powerful, the playful som in the water and who crosses the Dasapavitra made of sheep's hair by praises. The hymns praise the savans' mon. (11)

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