Popular:
ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 108 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 108 • ऋचा / मन्त्र 14

9.108.14

Mantra ID: 9.108.14

यस्य॑ न॒ इन्द्रः॒ पिबा॒द्यस्य॑ म॒रुतो॒ यस्य॑ वार्य॒मणा॒ भगः॑ । आ येन॑ मि॒त्रावरु॑णा॒ करा॑मह॒ एन्द्र॒मव॑से म॒हे ॥ (१४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 9.108.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हमारे जिस सोम को इंद्र, मरुत्‌, अर्यमा एवं भग पीते हैं एवं जिसके द्वारा हम मित्र, वरुण और इंद्र को अपनी रक्षा के लिए अभिमुख करते हैं, वे ही सोम निचोड़े जाते हैं. (१४)

EN English Translation

The soma that Indra, Marut, Aryama and Bhaga drink and by which we lead our friends, Varuna and Indra, to protect ourselves, are the same som squeezes. (14)

卐 HinduText AI