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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 111 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 111 • ऋचा / मन्त्र 2

9.111.2

Mantra ID: 9.111.2

त्वं त्यत्प॑णी॒नां वि॑दो॒ वसु॒ सं मा॒तृभि॑र्मर्जयसि॒ स्व आ दम॑ ऋ॒तस्य॑ धी॒तिभि॒र्दमे॑ । प॒रा॒वतो॒ न साम॒ तद्यत्रा॒ रण॑न्ति धी॒तयः॑ । त्रि॒धातु॑भि॒ररु॑षीभि॒र्वयो॑ दधे॒ रोच॑मानो॒ वयो॑ दधे ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.111.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुमने पणियों द्वारा चुराया हुआ गोधन प्राप्त किया था. तुम यज्ञस्थल में यज्ञ के धारण करने वाले जलों से अच्छी तरह शुद्ध होते हो. तुम्हारा शब्द दूर पर गाए जाने वाले साम मंत्रों के समान सुनाई देता है. तुम्हारा शब्द सुनकर यजमान प्रसन्न होते हैं. उज्ज्वल सोम तीनों लोकों को धारण करने वाले जलों की दीप्तियों के द्वारा स्तोताओं को अन्न देते हैं. (२)

EN English Translation

Hey Mon! You had received the stolen money by the pangs. You are well purified by the water that you hold the yajna in the place of yajna. Your word sounds like the sama mantras sung at a distance. Hosts are pleased to hear your word. The bright soma gives food to the hymns through the lamps of water holding the three lokas. (2)

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