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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 16 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 16 • ऋचा / मन्त्र 3

9.16.3

Mantra ID: 9.16.3

अन॑प्तम॒प्सु दु॒ष्टरं॒ सोमं॑ प॒वित्र॒ आ सृ॑ज । पु॒नी॒हीन्द्रा॑य॒ पात॑वे ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.16.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अध्वर्यु! शत्रुओं द्वारा अप्राप्त, अंतरिक्ष में वर्तमान व अन्यों द्वारा अपराजित सोम को दशापवित्र पर डालो एवं इंद्र के पीने के लिए शुद्ध करो. (३)

EN English Translation

O adhwaryu! Undeserved by enemies, present in space and undefeated by others, put soma on dashapavitra and purify Indra to drink. (3)

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