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9.16.7
दि॒वो न सानु॑ पि॒प्युषी॒ धारा॑ सु॒तस्य॑ वे॒धसः॑ । वृथा॑ प॒वित्रे॑ अर्षति ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.16.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जिस प्रकार अंतरिक्ष से जल नीचे बरसता है, उसी प्रकार शक्तिदाता सोम की तृप्त करने वाली धाराएं दशापवित्र पर जाती हैं. (७)
EN English Translation
Just as water flows down from space, so do the satiating streams of shaktidata soma go to dashapavitra. (7)