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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 20 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 20 • ऋचा / मन्त्र 6

9.20.6

Mantra ID: 9.20.6

स वह्नि॑र॒प्सु दु॒ष्टरो॑ मृ॒ज्यमा॑नो॒ गभ॑स्त्योः । सोम॑श्च॒मूषु॑ सीदति ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.20.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यज्ञादि के वहन करने वाले वे सोम अंतरिक्ष में वर्तमान होकर हाथों द्वारा कठिनाई से रगड़े जाते हैं एवं चमू नामक पात्रों में स्थित होते हैं. (६)

EN English Translation

Those who carry the yajnaadi are present in the som space and are hard-rubbed by the hands and are located in the characters called Chamu. (6)

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