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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 21 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 21 • ऋचा / मन्त्र 5

9.21.5

Mantra ID: 9.21.5

आस्मि॑न्पि॒शङ्ग॑मिन्दवो॒ दधा॑ता वे॒नमा॒दिशे॑ । यो अ॒स्मभ्य॒मरा॑वा ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.21.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! जो यजमान हमें चुपचाप दान करता है, उस अभिलाषा करने वाले यजमान को नाना प्रकार का धन दो. (५)

EN English Translation

Hey Mon! Give the host who donates to us quietly, give various kinds of money to the wishing host. (5)

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