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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 25 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 25 • ऋचा / मन्त्र 6

9.25.6

Mantra ID: 9.25.6

आ प॑वस्व मदिन्तम प॒वित्रं॒ धार॑या कवे । अ॒र्कस्य॒ योनि॑मा॒सद॑म् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.25.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अतिशय मादक एवं क्रांत प्रज्ञा वाले सोम! तुम पूजनीय इंद्र के स्थान को प्राप्त करने के लिए दशापवित्र को पार करके धारा के रूप में बहो. (६)

EN English Translation

This is the most intoxicating and krant pragya wale mon! You cross the Dashapavitra to attain the place of the revered Indra and flow as a stream. (6)

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