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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 26 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 26 • ऋचा / मन्त्र 2

9.26.2

Mantra ID: 9.26.2

तं गावो॑ अ॒भ्य॑नूषत स॒हस्र॑धार॒मक्षि॑तम् । इन्दुं॑ ध॒र्तार॒मा दि॒वः ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.26.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्तुतियां अनेक धाराओं वाले, क्षीणतारहित, दीप्तिशाली एवं स्वर्ग को धारण करने वाले सोम की स्तुति करती हैं. (२)

EN English Translation

The praises, praise the many-streamed, the one who can not be emasculated, the radiant and the heaven assuming Som. (2)

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