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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 28 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 28 • ऋचा / मन्त्र 3

9.28.3

Mantra ID: 9.28.3

ए॒ष दे॒वः शु॑भाय॒तेऽधि॒ योना॒वम॑र्त्यः । वृ॒त्र॒हा दे॑व॒वीत॑मः ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.28.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये मरणरहित, शत्रुहंता और देवों की अतिशय अभिलाषा करने वाले सोम अपने स्थान में शोभा पाते हैं. (३)

EN English Translation

These deathless , enemy destroyer and deity seeking Som's adorn in their place. (3)

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