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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 3 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 3 • ऋचा / मन्त्र 8

9.3.8

Mantra ID: 9.3.8

ए॒ष दिवं॒ व्यास॑रत्ति॒रो रजां॒स्यस्पृ॑तः । पव॑मानः स्वध्व॒रः ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.3.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

शोभन यज्ञ वाले एवं अपराजित पवमान सोम सभी लोकों को तिरस्कृत करते हुए स्वर्ग को जाते हैं. (८)

EN English Translation

Shobhan Yajnawale and Aparajit Pavman Som goes to heaven despising all the people. (8)

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