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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 33 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 33 • ऋचा / मन्त्र 2

9.33.2

Mantra ID: 9.33.2

अ॒भि द्रोणा॑नि ब॒भ्रवः॑ शु॒क्रा ऋ॒तस्य॒ धार॑या । वाजं॒ गोम॑न्तमक्षरन् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.33.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पीले रंग वाले एवं दीप्तिशाली सोम गोयुक्त अन्न प्रदान करते हुए अमृत की धारा के रूप में द्रोणकलश में गिरते हैं. (२)

EN English Translation

The yellow-coloured and radiant som falls into the dronkalash as a stream of nectar while providing the goyukta food. (2)

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