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9.37.2
स प॒वित्रे॑ विचक्ष॒णो हरि॑रर्षति धर्ण॒सिः । अ॒भि योनिं॒ कनि॑क्रदत् ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.37.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
सबके द्रष्टा, हरे रंग वाले एवं सबको धारण करने वाले वे सोम पहले दशापवित्र पर जाते हैं. बाद में शब्द करते हुए द्रोणकलश में गिरते हैं. (२)
EN English Translation
The seers of all, those who are green and wearing all, they go to Dashapavitra first. Later, the words fall into the dronakalash. (2)