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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 42 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 42 • ऋचा / मन्त्र 4

9.42.4

Mantra ID: 9.42.4

दु॒हा॒नः प्र॒त्नमित्पयः॑ प॒वित्रे॒ परि॑ षिच्यते । क्रन्द॑न्दे॒वाँ अ॑जीजनत् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.42.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम प्राचीन रस को टपकाते हुए दशापवित्र पर सींचे जाते हैं एवं शब्द करते हुए देवों को अपने समीप उत्पन्न करते हैं. (४)

EN English Translation

Som is watered on the dashapavittra dripping the ancient rasa and produces the gods near him by making words. (4)

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