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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 47 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 47 • ऋचा / मन्त्र 2

9.47.2

Mantra ID: 9.47.2

कृ॒तानीद॑स्य॒ कर्त्वा॒ चेत॑न्ते दस्यु॒तर्ह॑णा । ऋ॒णा च॑ धृ॒ष्णुश्च॑यते ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.47.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इन सोम के असुरनाशन आदि कर्म हमने किए हैं. शत्रुओं को हराने वाले सोम यजमानों के ऋण भी चुकाते हैं. (२)

EN English Translation

We have done the asurashana etc. deeds of these somas. The mons who defeat the enemies also pay the debts of the hosts. (2)

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