Popular:
ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 48 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 48 • ऋचा / मन्त्र 4

9.48.4

Mantra ID: 9.48.4

विश्व॑स्मा॒ इत्स्व॑र्दृ॒शे साधा॑रणं रज॒स्तुर॑म् । गो॒पामृ॒तस्य॒ विर्भ॑रत् ॥ (४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 9.48.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बाज पक्षी जल बरसाने वाले, यज्ञ के रक्षक एवं सबको देखने वाले देवों के रस सोम को समानरूप से लाया था. (४)

EN English Translation

The hawk bird brought the rasa som of the gods who rained water, the protector of the yagna and the seer of all. (4)

卐 HinduText AI