Popular:
ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 49 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 5

9.49.5

Mantra ID: 9.49.5

पव॑मानो असिष्यद॒द्रक्षां॑स्यप॒जङ्घ॑नत् । प्र॒त्न॒वद्रो॒चय॒न्रुचः॑ ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 9.49.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये निचुड़ते हुए सोम राक्षसों को मारते हुए एवं अपनी दीप्तियों को पहले के समान प्रकाशित करते हुए टपकते हैं. (५)

EN English Translation

These lingering mons drip, killing the demons and illuminating their lamps as before. (5)

卐 HinduText AI