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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 53 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 53 • ऋचा / मन्त्र 3

9.53.3

Mantra ID: 9.53.3

अस्य॑ व्र॒तानि॒ नाधृषे॒ पव॑मानस्य दू॒ढ्या॑ । रु॒ज यस्त्वा॑ पृत॒न्यति॑ ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.53.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे निचुड़ते हुए सोम! तुम्हारे इस कर्म को दुष्टबुद्धि राक्षस नहीं सह सकते. जो तुमसे युद्ध करना चाहता है, उसे तुम बाधा दो. (३)

EN English Translation

Oh, lingering Mon! Evil-minded monsters cannot bear this deed of yours. Whoever wants to fight you, hinder him. (3)

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