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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 56 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 56 • ऋचा / मन्त्र 2

9.56.2

Mantra ID: 9.56.2

यत्सोमो॒ वाज॒मर्ष॑ति श॒तं धारा॑ अप॒स्युवः॑ । इन्द्र॑स्य स॒ख्यमा॑वि॒शन् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.56.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब सोम की यज्ञाभिलाषिणी सौ धाराएं इंद्र की मित्रता प्राप्त करती हैं, तब वह हमारे लिए अन्न देते हैं. (२)

EN English Translation

When the yajnabhilashani of Soma receives the friendship of Indra, then he gives us food. (2)

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