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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 58 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 58 • ऋचा / मन्त्र 3

9.58.3

Mantra ID: 9.58.3

ध्व॒स्रयोः॑ पुरु॒षन्त्यो॒रा स॒हस्रा॑णि दद्महे । तर॒त्स म॒न्दी धा॑वति ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.58.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हमने ध्वस्र और पुरुषंति नामक राजाओं से हजारों धन लिए हैं. स्तोताओं को पाप से बचाने वाले एवं देवमदकारी सोम चलते हैं. (३)

EN English Translation

We have taken thousands of money from kings called Dhvasa and Purushunti. Soma, who protects the psalms from sin, walks. (3)

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