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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 61 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 1

9.61.1

Mantra ID: 9.61.1

अ॒या वी॒ती परि॑ स्रव॒ यस्त॑ इन्दो॒ मदे॒ष्वा । अ॒वाह॑न्नव॒तीर्नव॑ ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.61.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुम इंद्र के उपभोग के लिए उस रस के रूप में नीचे गिरो, जिसने संग्रामों में श्रुओं की निन्यानवे नगरियों को समाप्त किया था. (१)

EN English Translation

Hey Mon! You fall down as the juice for the consumption of Indra, who had ended the ninety-nine cities of the Shroos in the struggles. (1)

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