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9.64.15
पु॒ना॒नो दे॒ववी॑तय॒ इन्द्र॑स्य याहि निष्कृ॒तम् । द्यु॒ता॒नो वा॒जिभि॑र्य॒तः ॥ (१५)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 9.64.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे शक्तिशाली, यजमानों द्वारा गृहीत, यज्ञ के निमित्त शुद्ध होते हुए एवं दीप्तिशाली सोम! तुम इंद्र के स्थान पर जाओ. (१५)
EN English Translation
O mighty, accepted by the hosts, pure and radiant for the sake of the yagna! You go to Indra's place. (15)