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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 64 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 15

9.64.15

Mantra ID: 9.64.15

पु॒ना॒नो दे॒ववी॑तय॒ इन्द्र॑स्य याहि निष्कृ॒तम् । द्यु॒ता॒नो वा॒जिभि॑र्य॒तः ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.64.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शक्तिशाली, यजमानों द्वारा गृहीत, यज्ञ के निमित्त शुद्ध होते हुए एवं दीप्तिशाली सोम! तुम इंद्र के स्थान पर जाओ. (१५)

EN English Translation

O mighty, accepted by the hosts, pure and radiant for the sake of the yagna! You go to Indra's place. (15)

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